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और प्राण: आख़िर सरकार ने इस महान हस्ति को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से नवाज़ा



April 15, 2013 06:27:37 PM IST
updated April 18, 2013 04:46:49 PM IST
By नलिन
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प्राण, जो कि अब जीवन के नब्बेवें वसंत में प्रवेश कर चुके हैं, को सरकार ने दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से नवाज कर इस महान कलाकार की बहुमुखी प्रतिभा को सम्मानित किया है। प्राण को समझने के लिए और उनकी अभिनय यात्रा में शरीक होने के लिए, बन्नी रुएबेन द्वारा लिखी किताब - और प्राण - के द्वारा बखूबी समझा जा सकता है।

अमिताभ बच्चन ने जब यह किताब लगभग पांच साल पहले आई थी तो उसके प्रकथन में लिखा था कि अगर प्राण सरीखे कलाकार हॉलीवुड में होते तो वहां की सरकार ने उनको सर आँखों पे बिठाया होता। खैर देर आये दुरुस्त आये । इस मौके पर प्राण को समझने के लिए इस किताब से बेहतर और कोई साधन हो ही नहीं सकता था।

गौर तलब है कि इस किताब का शीर्षक और प्राण इसलिए रखा गया क्योंकि प्राण ही पहले ऐसे कलाकार थे जिनके साथ फिल्म की कास्टिंग में यह लिख कर आता था - और प्राण, ऐसा उनके बाद बहुत कम कलाकरों के साथ हुआ और यह इस बात को रेखांकित करता है कि प्राण के अभिनय की उस दौर में कितनी एहमियत थी।

CHECK OUT: Pran honoured with Dadasaheb Phalke Award

कितने लोग शायद इस बात को जानते होंगे कि अजय देवगन के पिता वीरू देवगन को बतौर फाइट मास्टर हिंदी सिनेमा में लाने का श्रेय प्राण का है? प्राण एक ऐसे विरले कलाकार थे जो कि आलोचकों की आलोचना को सर आँखों पे लेकर अपने अभिनय में नयापन लाने के लिए प्रयासरत रहते थे, कितने ऐसे कलाकार हैं आज के युग में जो कि इस दिशा में सोचते भी होंगे ? पंधारी जुनकर जिनको हिंदी सिनेमा के मेकअप का गुरू माना जाता है ने किताब में बताया है, कि प्राण अकेले ऐसे कलाकार थे जो कि एक बार मेकअप कर लेते थे तो तब तक नहीं उतारते थे, जब तक उस फिल्म का उस दिन का शॉट ख़तम न हो जाये।

हिंदी सिनेमा में सिगरेट पीने के अंदाज को भी नई परवाज़ देने में प्राण ने ही पहल की थी, और उनका सिगरेट के धुएं को छल्ला बनाकर उड़ाने का अंदाज इतना लोकप्रिय हुआ था कि उसे शत्रुघ्न सिन्हा और रजनीकांत ने भी अपना ट्रेडमार्क बनाया था। आमिर खान ने भी प्राण के सिगरेट पीने के इस अंदाज को फिल्म घुलाम में दोहराया था। अमिताभ बच्चन की कालजयी फिल्मों को कालजयी बनाने में प्राण ने अहम् भूमिका निभायी थी।

आज जबकि हिंदी सिनेमा एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ उसको नयी परवाज देने की जरूरत है, ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए कि प्राण को इस पुरस्कार से नवाजने से प्रेरित होकर हमारे निर्माता निर्देशक चरित्र अभिनेताओं के पात्र ऐसे शशक्त लिखेंगे कि एक नया प्राण पैदा हो सके और इस महान कलाकार के लिए इससे बड़ा सलाम कुछ नहीं होगा, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भी नहीं।

 
  

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