clear clear clear clear clear
clear
  
Movies

शमशाद बेगमः हिंदी सिनेमा की मौसीकी की पहली गाईका नहीं रही



April 25, 2013 05:15:27 PM IST
By Glamsham Editorial
Send to Friend

SHAMSHAD BEGUM
SHAMSHAD BEGUM
अब जबकि १०-१ २ दिन ही बचे हैं हिंदी सिनेमा के सौ साल की उपलब्धि का जश्न मनाने के, ऐसे में शमशाद बेगम का इस दुनिया से रुखसत हो जाना वाकई में मौसीकी के प्रेमियों के लिए एक आघात से कम नहीं होगा. उनका गायकी का सफ़र भले ही उतना लम्बा न रहा हो पर, वो कुछ वैसा ही था जैसा की फिल्म आनंद में गुलजार ने डायलाग लिखा था और जिसे राजेश खन्ना पर फिल्माया गया था- कि जिन्दगी बड़ी होनी चाहिए जहापनाह लम्बी नहीं, और शमशाद बेगम उन कुछ चुनिन्दा आवाजों में से होंगी जिनका द्वारा गाये गए गाने भली ही संख्या में कम होंगे, पर वो इतने मशहूर हैं और रहेंगे कि जब तक गाने सुनने वालों की जमात दुनिया में रहेगी शमशाद बेगम का नाम अजर अमर रहेगा

शमशाद बेगम हिंदी सिनेमा की पहली महिला पार्श्व गायिका थीं, और श्वेत श्याम जमाने के सिनेमा की शुरुवाती दौर की सबसे खनकती हुई आवाज़ की मालकिन। चाहे वो लेके पहला पहला प्यार गाना हो फिल्म सी आई डी से, या इसी फिल्म का 'कही पे निगाहें कहीं पे निशाना' या 'बूझ मेरा क्या नाव रे नदी किनारे गाऊँ रे', अगर शमशाद बेगम ने शायद ये गाने न गए होते तो सी आई डी उतनी सफल फिल्म न साबित होती। उनकी ही खनकती आवाज ने हिंदी सिनेमा को पहली महिला कव्वाली गायिका दी फिल्म जीनत में और शमशाद बेगम ने इस मील के पत्थर को हासिल किया था 1945 में और ये शायद कुदरत की ही मैहर रही होगी क्योंकि शमशाद बेगम नें फिल्म बरसात की रात में यह दिखला दिया था की हिंदी सिनेमा में कव्वाली गायकी में उनका कोई मुकाबला नहीं है. कव्वाली के शौकीनों के लिए बरसात की रात में मुहम्मद रफ़ी, मन्ना दे और शमशाद बेगम की त्रिवेणी से बढ़िया कोई और उदहारण हो ही नहीं सकता.

CHECK OUT: Shamshad Begum - A voice with naughtiness in nodes after nodes

शमशाद बेगम की ही वो पहली आवाज थी जिसने टेलीफोन के आविष्कार का एक प्रेमी युगल के जीवन में क्या महत्व होता है अपनी आवाज में बयां करके बताया था - 'मेरे पिया गए रंगून वहां से किया है टेलीफून' गाने से. शमशाद बेगम के अन्य कालजयी गानों में शामिल है- 'कजरा मोहब्बत वाला अंखियों में ऐसा डाला', 'ओ गाडी वाले गाडी धीरे हांक रे', इन सारे गानों के कालजयी होने की सबसे बड़ी वजह थी शमशाद बेगम की आवाज में मिटटी की महक, इस आवाज को जबभी गानों के शौक़ीन कही भी सुनते हैं, तो सहसा ही ऐसा एहसास होता हैं मानो एक सौंधी सी खुशबू और एक सौंधे से एहसास ने सराबोर कर दिया हो.

यही था इस आवाज का जादू कि जिसने हालाँकि 1950 के बाद कोइ भी गाना नहीं गाया, पर उस आवाज की ताजगी का एहसास इस बात को रेखांकित करता है कि शमशाद बेगम जैसी खनकती आवाज के मालिक विरले ही होते हैं। जब तक हिंदी गाने इस जहां में रहेंगे शमशाद बेगम की आवाज उन्हें अपने मस्ती के नशे में सराबोर करती रहेगी और मई महीने में जब हिंदी सिनेमा अपने सौ साल मनाएगा तो यही उम्मीद की जाती है कि इस खनकती आवाज की जादूगरनी को भी सम्मानित किया जाएगा.


 
 

 More on Glamsham


- Abbas' son Mustafa is a huge fan of this Khan - News
- Arbaaz Khan celebrates father-in-law's birthday with Malaika - News
- Ayesha Takia is back in shape and how! - News
- Badri Varun and his Dulhania Alia indulges in PDA - News
- BAYWATCH poster: Meet Priyanka Chopra as the red hot Victoria Leeds - News
- Bollywood Box Office Report Of The Week: 23th February 2017 - News
- Bollywood's SHAHENSHAH says his famous dialogue to the Queen - News
- EXCLUSIVE: Nana Patekar candidly speaks about Priyanka Chopra, movies and love stories! - News
- Hiten Tejwani's movie date with wife Gauri - News
- Huma Qureshi first Indian actress to go live on social media in London - News
- Iulia Vantur & Salman Khan avoid each other at an event - News
- Iulia Vantur's attire grabs eye balls at this event - News
- 'Jolly' Akshay Kumar'advocates' Ayurved for healthy body - News
- MACHINE trailer keeps the audience on tenterhooks - News
- PHILLAURI's modern-desi wedding song of the year 'Whats Up' is here - News

   News Archives


   Comments

A Fifth Quarter Infomedia Pvt. Ltd. site.