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आमिर खान: 25 सालों का रूमानी हिंदी सिनेमा का रूमानी सफ़र



May 2, 2013 06:40:05 PM IST
By नलिन, btnn
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आज भी वो दिन याद है, इलाहबाद की चिलचिलाती गर्मी में यूनिवर्सिटी से क्लास बंक करके पूरी क्लास एक नयी रोमांटिक फिल्म देखने गयी थी, उस समय जब विश्वविद्यालय में भी ग्रेजुएशन का आख़िरी साल होने की वजह से जिनका भी रोमांस संभव हो सका था वो उन पलों को समेट लेना चाहते थे, और अस्सी के दशक में जबकि सिनेमा से रोमांस गायब हो चुका था, क़यामत से क़यामत तक नाम की फिल्म देखने के लिए गौतम सिनेमा हॉल, जो कि आज एक मल्टीप्लेक्स में परिवर्तित हो चुका है, में ऐसा लग रहा था जैसे पूरा विश्वविद्यालय ही इस फिल्म को देखना चाहता हो. आलम तो यह था कि इंटरवल के बाद जैसे ही फिल्म ने जोर पकड़ा युगल जोड़े जो झिझक के कारण पहले अलग अलग बैठे थे, एक साथ बैठ गए, और एक साहेब को जब अपनी प्रेयसी के साथ बैठने के लिए जगह नहीं मिली तो वो बगल में रखे डस्टबिन पर ही बैठ गए . यह था उस फिल्म का कमाल और ये था उस नए कलाकार का जादू . जी हाँ, 1988 से शुरू हुआ आमीर खान का जादू आज भी उस पीढी के बाद की सभी पीढ़ियों पे सर चढ़ के बोल रहा है.

क़यामत से क़यामत को एक मई 1988 को देखने के बाद लगभग हर ही हफ्ते युगल जोड़े इस फिल्म को देखने जाते रहे और बहुत दिनों बाद पापा कहते हैं गाने पर सिनेमा हाल में पैसे फेंके गये. शायद इस फिल्म की टाइमिंग ऐसी थी, उत्तर भारत में ग्रेजुएशन की परीक्षा ख़तम होने के बाद सभी को एक अदद नौकरी की दरकार थी, और उसको तलाशने में पापा कहते हैं गाने ने एक अहम् भूमिका निभाई थी।

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आखिर क्या है आमिर खान का जादू २५ सालों के बाद जब आमिर खान ने उस मौके को याद किया तो अपने उसी गाने को गाके याद किया- 'पापा कहते हैं' ! आमिर खान की इतनी लम्बी पारी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह हैं की अपनी हर फिल्म के साथ आमिर खान ने अपने आप को नए रूप में प्रस्तुत किया है, उन्होंने कभी अपने आप को दोहराया नहीं, और शायद यही सबसे बड़ी वजह है कि आमिर खान को टाइम्स मैगज़ीन ने भी विश्व के सौ ऐसे लोगों की श्रेणी में शामिल किया है जो कि नए विचारों को आगे लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आमिर खान की प्रसिध्धि का सबसे बड़ा कारण रहा है कि उन्होंने कभी भी पानी के साथ तैरने की कोशिश नहीं की, बल्कि उसकी उल्टी दिशा में तैर कर अपना एक अलग मुकाम बनाने का प्रयास किया है. नहीं तो एक ऐसा कलाकार जिसको अपनी पहली ही फिल्म से इतनी बड़ी सफलता मिली हो अपने अगली फिल्म- राख को रिलीज़ होने से रोक देता क्योंकि इस फिल्म में उनकी भूमिका एक दम ही अलग किस्म की थी, या फिर होली, जो वैसे तो क़यामत से क़यामत तक से पहले बनी पर रिलीज़ बाद में हुई, में भी उनकी भूमिका एक प्रतिशोधी की थी।

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आमिर के फिल्मों से एक बाद जो बहुत स्पष्ट रूप से उभर कर आती है वो है उनकी तैयारी उस पात्र को अभिनीत करने की, और ऐसा नहीं है की तैयारी को उन्होंने एहमियत देनी शुरू की सिनेमा में पदार्पण करने के बाद. सिनेमा में आने से पहले उन्होंने सिनेमा के क्राफ्ट का काफी लम्बे समय तक किया और तब पदार्पण किया। और यही वजह है कि आमिर खान एक बार में एक ही फिल्म करते है। ऐसा कौन सा कलाकर होगा जो कि एक पात्र को अभिनीत करने के लिए रूपहले परदे से गायब हो जाएगा पर आमिर ने ऐसा किया मंगल पाण्डेय का पात्र अभिनीत करने के लिए, जहाँ उनको अपने बाल बढाने थे, और साथ ही साथ अपने किरदार को फिल्म फिल्म के रिलीज़ होने से पहले जग जाहिर होने नहीं देना था, कुछ ऐसा ही उन्होंने किया था गजिनी के पात्र को अभिनीत करने के लिये.

जब वो ऐसे प्रयास करते हैं अपने काम को अमलीजामा पहनाने के लिया तो दर्शक भी तो उन्हें नवाजते हैं अपने प्यार से। आमिर खान हिंदी सिनेमा के पहले ऐसे कलाकार हैं जिनकी फिल्म ने सौ करोड़ का व्यवसाय किया, फिल्म थी गजिनी और उसके बाद उन्होंने एक नया प्रतिमान स्थापित किया थ्री इडियट्स से. उन्होंने आईना दिखाया समाज को, कि बच्चों को अपना भविष्य चुनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए और उनको वो करियर नहीं अपनाना चाहिए जो उनके माँ बाप उनपर थोपें।

CHECK OUT: 25 nuggets of Aamir Khan's career Part-2

आमिर खान ने आज की पीढी को अपने अधिकारों से लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया अपनी फिल्म रंग दे बसन्ती से, और आज हर शहर में जब युवा पीढी या पूरा समाज ही किसी ऐसे मुद्दे के खिलाफ उठ खड़ा होता है जिसमे कही कुछ गलत है तो उसके लिया कही न कहीं प्रेरणा रंग दे बसन्ती से ही मिलती है. और आमिर ने तो रंग दे बसंती के अपने प्रयास को एक सरोकार के रूप में अपने टेलीविज़न के पदार्पण के साथ, सत्यमेव जयते के माध्यम से, देश को ही झंकझोर दिया .

आज जबकि उन्होंने सिनेमा के साथ अपने संबंधों की सिल्वर जुबली मनाई है, उनके सारे फैन यही दुआ देंगे की इससे ज्यादा जोशोखरोश से वो हिंदी सिनेमा के साथ अपने संबंधों की गोल्डन जुबली भी मनाएं.

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