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Movies

बी. ए. पास : शारीरिक जरूरतें और सामाजिक मान्यताएं



May 31, 2013 08:17:13 PM IST
updated June 6, 2013 07:50:42 PM IST
Byनलिन, Glamsham Editorial
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कुछ हि दिन मे रिलीज होने वाली फिल्म बी ए पास, जिसका निर्देशन अजय बह्ल ने किया है हमारे समाज की सेक्स से सम्बंधित मान्यताओं का एक सजीव चित्रण है और जिस बेबाकपन के अंदाज से इस फिल्म को बनाया गया है, उसी के कारण इस फिल्म को दुनिया भर में विभिन्नप्रकार के पुरस्कारों से नवाजा भी गया है.

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यह एक शाश्वत सत्य है की वो चाहे पुरुष हो या स्त्री सबकी अपनी सेक्स से सम्बंधित आकांक्षाएं होती हैं और उनको पूरा करने के प्रयास में विभिन्न प्रकार के प्रयोजन भी किया जाते है . पर चूंकि इन प्रयोजनों को सामाजिक मान्यता नहीं है, इसलिए ऐसे प्रयास जहाँ शरीर की आवश्यकताएं पूरी करने के लिए किये जाने वाले प्रयोजन एक आदत बन जाएँ वहां उसके दुष्कर परिणाम भी भुगतने पड़ सकते है. बी. ए. पास कहानी है एक ऐसे ही प्रयोजन की, और इसमें चक दे इंडिया की मशहूर कलाकार शिल्पा शुक्ला ने अग्रणीय भूमिका निभाई है और बड़े ही बेबाक तरीके से, बिना किसी झिझक के रुपहले परदे पर सेक्स से सम्बंधित दृश्यों को अंजाम दिया है. यहाँ पर भारतीय सेंसर बोर्ड की भी तारीफ़ करनी होगी की उन्होंने इस फिल्म को पास किया जिसमे पूरी फिल्म के 95 मिनट की अवधि में २२ मिनट दिए गए हैं अन्तरंगदृश्यों को, और इन अन्तरंग दृश्यों को शिल्पा शुक्ला के साथ निभाया है शादाब कमल ने.

बी. ए. पास के बारे में सबसे अहम् बात यह है कि यह एक आधुनिक कहानी पर आधारित है जिसका नाम है 'डी रेलवे आंटी' जिसको लिखा है मोहन सिक्का ने. कहानी नोयर की श्रेणी का प्रतिनिधित्व करती है, नोयर यानी कि ऐसी कहानी जो कि समाज के एक कटु सत्य से पर्दा उठाती है, जो इस फिल्म ने भी उठाने का प्रयास किया है, कटु सत्य है किस प्रकार बड़े शहरों में अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए गृहणियां जवानी की देहलीज पर कदम रखने वाले लड़कों का इस्तेमाल करती हैं- जैसा कि इस फिल्म का एक डायलाग भी है जो शिल्पा शुक्ला ने कहा है- 'सिखाया मैंने तुझे और मजा सब ले रहे हैं.' पर ऐसा नहीं है कि यह बड़े शहरों ही है, इसके विभिन्न आयाम छोटे शहरों में भी देखने को मिलते रहते हैं, और समय समय पर सिनेमा ने इस पहलु को उजागर किया है, छोटे शहर को आधार बनाया था अरुणा राजे की फिल्म रिहाई ने, जबकि ऐतिहासिक रूप में इसको दर्शाया था शशी कपूर की फिल्म उत्सव ने.

CHECK OUT: B.A. PASS and sexual escapades in Bollywood

जहाँ एक तरफ बी ए पास समाज के एक छुपे हुए पहलू को उजागर करती है, दूसरी तरफ परोक्ष रूप से ये इस बात को भी रेखांकित करती है की आने वाले पीढी के लिए सेक्स सम्बंधित शिक्षा पर ध्यान देने की कितनी जरूरत है. सिनेमा के प्रेमियों के लिए बी ए पास समर ऑफ़ फोर्टी टू की भी याद दिल सकती है, फर्क सिर्फ ये है कि समर ऑफ़ फोर्टी टू में एक रोमांटिक पहलू था, जबकि बी ए पास में एक सामाजिक सच्चाई को बेबाक अंदाज में बयान किया गया है.

उम्मीद यही की जाती है कि जिस तरह से पुरस्कारों ने इस फिल्म को शुशोभित किया है, उसी तरह से दर्शक भी अपने प्यार से इसे नवाजेंगे . जब ऐसा होगा तभी और निर्माता निर्देशक इस तरह की फिल्मों को बनाने के लिए आगे आएँगे .


 
  

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